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Showing posts from July, 2022

समय का कीमत

जब कोई इंसान 100 साल जीवित रहता है तब वह  इंसान अपने जीवन के 24 साल सोने में निकाल देता है और 11 साल टीवी देखने में सोशल मीडिया पर समय वेस्ट करने में और दोस्तों के साथ निकाल देता है बाकी बचे 75 जिसमें शुरुआत के 15 साल तक स्कूल जाने में कालेज् जाने में खेलने कूदने में निकल जाते हैं आपको पता है ताश के 52 पत्ते खेल में बराबर सबको बांटे जाते हैं लेकिन उस खेल में जो माहिर होता है वही जीत पाता है वैसे ही दुनिया में सब को 24 घंटे बराबर दिए गए हैं लेकिन कुछ लोग 24 घंटे को दिन रात एक कर के अपने सपने को पूरा कर लेते हैं और कुछ लोग इसे 24 घंटे में बस रोते रहते हैं कि समय नहीं है रेत को चाहे जितने ही कस कर मुट्ठी में पकड़ लो वह हाथ से फिसल ही जाती है ठीक वैसे ही समय भी निकलता जाता है जिस समय आप गुजरे हुए वक्त पर अफसोस कर रहे होते हैं याद रखिए उस समय भी वक्त गुजर ही रहा होता है हम सोचते रह जाते हैं कि जब सही समय आएगा तो यह करेंगे वह करेंगे लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि वक्त कभी नहीं आता है वक्त केवल जाता है और सही समय कभी खुद से नहीं आता उसे लाना पड़ता है  अभी जो समय चल रहा है , वहीं सर्वश्र...

हम समय कीमत करें समय हमारा कीमत करेगा

समय की कीमत क्या हम जानते हैं कि समय कि कीमत कैसे किया जाता है जिस दिन हम समय की मत करना जान जाएंगे हम सक्सेस हो जाएंगे दुनिया में लगभग हंड्रेड परसेंट सक्सेस इंसान नहीं है इसका मतलब यह है कि मेहनत और लगन नहीं है दुनिया में बस 5 परसेंट ऐसे व्यक्ति हैं जो सक्सेस हैं और 95% व्यक्ति जो है वह 5 परसेंट के भरोसे बैठे हुए हैं अभी आपको हम एक उदाहरण बताते हैं कि कैसे 5 परसेंट के लोग सफल हैं और 95% के लोग असफल है । एक व्यक्ति था वह इस बात को सिद्ध करने के लिए एक फारवर्ड व्यक्ति के पास गया जो कि अमीर पर्सन था वह उनसे पूछा कि आपके बच्चे कहां गए हैं तो उन्होंने यह बताया कि अभी मेरा बच्चा गया है यूपीएससी की कोचिंग में गया है  फिर उन्होंने पूछा कि आपकी बेटी क्या करती है तो  बताया कि मेरी बेटी आईएस की तैयारी कर रही है तो उन्होंने फिर पूछा कि अगर वह दोनों घर पर आते हैं तो उसके बाद क्या करेंगे तो वह आदमी बोला कि वह दोनों घर पर आते ही लंच करेंगे उसके बाद उनको लाइब्रेरी जाना होता है वह तैयारी करते हुए भी लाइब्रेरी में अपनी टाइम को स्पेंड करते हैं फिर वह आदमी वहां से चला गया और वह एक बैकवर्ड आदमी क...

स्वामी विवेकानंद जी की लाइब्रेरी की कहानी

स्वामी विवेकानंद जी जब शिकागो गए थे तब वह एक लाइब्रेरी में रोज जाते थे और वह उस लाइब्रेरी से सुबह में एक बुक लेते थे और शाम तक उसको उस लाइब्रेरी में रख देते थे ऐसे ही वह प्रतिदिन करते थे वहां बैठी एक महिला उनको रोज देखती थी और एक दिन उनसे पूछे कि तुम सुबह किताब ले जाते हो और शाम तक लौटा देते हो जब किताब पढ़ना ही नहीं होता है तो ले क्यों जाते हो मगर स्वामी विवेकानंद जी बोले कि मैं तो किताब पढ़ लेता हूं यह सुनकर उस महिला को गुस्सा आ गया और वह महिला उनसे सवाल पूछने के लिए 30 दिनों का बुक जो स्वामी विवेकानंद जी पढे हुए थे एक टेबल पर लाकर रख दी और उन सब किताबों में से एक किताब को उठाया और उसमें से सवाल पूछने लगी स्वामी विवेकानंद जी ने उस सवालों का जवाब देते हुए उस बुक में जिस पेज पर वह सवाल लिखा हुआ था उस पेज नंबर को भी बता दिया और जो उसने उत्तर पूछा था उत्तर देते हुए भी पूरा सारांश बता दिए जिससे कि वह महिला हैरान हो गई वह सोचने लगी कि एक व्यक्ति एक बुक को 1 दिन में कैसे पड़ सकता है इस कहानी से हमको यह सीख मिलती है कि हमारा जिस भी सब्जेक्ट में रुचि है हम उसको हंड्रेड परसेंट कर सकते हैं और उ...

हम क्यों सफल नहीं हो पाते

हम अपने आप को क्यों धोखे में रख रहे हैं जब डिजिटल इंडिया नहीं हुआ था तब भी हमारे डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी ने इतनी बड़ी सफलता हासिल की इनको हर एक वह कठिनाई का सामना करना पड़ा जो कि आज हम उस कठिनाई को सामने से भी फेस नहीं कर रहे हैं मगर  हमको यह लगता है कि नहीं हमारे यहां बहुत ही कठिनाई हमारे साथ चल रही है लेकिन ऐसा हरगिज़ भी नहीं है उस समय में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी ने जिस जिस कठिनाइयों से अपने आप को उभारा है आज वह कठिनाई हमारे पास नहीं है डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी ने हम सबको उस पीढ़ियों से उस जंजीरों से निकाला है कि हम आगे बढ़ सके मगर हम अपने आप को ही पीछे छोड़ते जा रहे हैं कि हमसे यह नहीं हो पाएगा   हम सोचते हैं कि हम से नहीं हो पाएगा अपने आपको हम स्वयं धोखा दे रहे हैं और यह बोलते हैं कि जो हार्वर्ड लोग होते हैं उन्हीं के लिए जॉब्स गवर्नमेंट नौकरी बिजनेस बने हुए हैं और हम अपने अंदर मजदूरी और कृषि कार्य के लिए सोच लेते हैं कि हमको यही करना है उस समय बाबा साहब सोचीए कितना संघर्ष किए होंगे कि वह अपने बहन भाइयों में चौदहवीं संतान थे और वह सभी का देहांत हो गया मगर वह अकेले स...

आज की कहानी

आज 25/07/2022 मैं सुबह प्रातः उठा और हमेशा की तरह आज भी तैयार होकर अपने स्कूल मे पढ़ाने गया और स्कूल में अच्छे से बच्चों को पढ़ाया और जैसे ही छुट्टी हुआ वैसे ही मुझे मेरे भाई का कॉल आया कि भैया मैं बैंक में आया था और बैंक में समूह का पैसा जमा करने के लिए मैं फार्म भर  रहा था तभी एक ब्राह्मण आदमी बैंक से बाहर निकला और वह अपने बाइक कि ओर  देखा उसके बाइक के पास मेरी साइकिल खड़ी थी और वह देखा कि  बाइक के मुंडे में थोड़ा स्क्रैच आया था वह देखकर क्रोधित हो गया और पूछा यह किसकी साईकिल है तुरंत मेरे भाई ने उसको जवाब दिया कि मेरा है और वह क्रोधित होकर मेरे भाई की ओर झपट पड़ा और कालर पकड़कर उसको घसीट कर   आगे की तरफ ले कर जाने लगा जिससे कि उसका पैसा ₹8000 गिर गया उसमें से ₹6000 मिला परंतु ₹2000 पासबुक के साथ गिरा लेकिन मिला नहीं और वह कालर पकड़कर डांट रहा था और गाली दे रहा था बोल रहा था कि मेरे बाइक का मुंडा क्यों तोड़ा मेरे भाई ने यह बोला कि आपको गलतफहमी हुई है मैंने आपका मुंडा नहीं तोड़ा है चाहे तो आप कैमरे में देख सकते हैं सीसीटीवी कैमरा ऑन करवाइए और देखिए कि हमने आपका...