हम क्यों सफल नहीं हो पाते

हम अपने आप को क्यों धोखे में रख रहे हैं जब डिजिटल इंडिया नहीं हुआ था तब भी हमारे डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी ने इतनी बड़ी सफलता हासिल की इनको हर एक वह कठिनाई का सामना करना पड़ा जो कि आज हम उस कठिनाई को सामने से भी फेस नहीं कर रहे हैं मगर  हमको यह लगता है कि नहीं हमारे यहां बहुत ही कठिनाई हमारे साथ चल रही है लेकिन ऐसा हरगिज़ भी नहीं है उस समय में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी ने जिस जिस कठिनाइयों से अपने आप को उभारा है आज वह कठिनाई हमारे पास नहीं है डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी ने हम सबको उस पीढ़ियों से उस जंजीरों से निकाला है कि हम आगे बढ़ सके मगर हम अपने आप को ही पीछे छोड़ते जा रहे हैं कि हमसे यह नहीं हो पाएगा   हम सोचते हैं कि हम से नहीं हो पाएगा अपने आपको हम स्वयं धोखा दे रहे हैं और यह बोलते हैं कि जो हार्वर्ड लोग होते हैं उन्हीं के लिए जॉब्स गवर्नमेंट नौकरी बिजनेस बने हुए हैं और हम अपने अंदर मजदूरी और कृषि कार्य के लिए सोच लेते हैं कि हमको यही करना है उस समय बाबा साहब सोचीए कितना संघर्ष किए होंगे कि वह अपने बहन भाइयों में चौदहवीं संतान थे और वह सभी का देहांत हो गया मगर वह अकेले संघर्ष करते हुए अपने देश के लिए बहुत बड़ा योगदान दिए और आज भी उनकी योगदान की बदौलत देश चल रहा है उस समय जब वह इतनी बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं तो आज हम इतना डेवलप्ड होकर इतने फ्री होकर इतनी सुविधा मिलते हुए भी हम अपने आप को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं इसका मतलब यह है कि हम अपने आपको स्वयं धोखा दे रहे हैं मगर हमको उठने की जरूरत है जागने की जरूरत है खुद को पहचानने की जरूरत है जिस दिन अपने आप को पहचान जाएंगे हम अपने आपको अपनी पीढ़ी को आने वाली पीढ़ी को सुधार सकते हैं मगर हम किसी और के सहारे बैठे हुए हैं की कोई आएगा और मेरे सभी दुखों को हटाएगा ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है जितना आप परिश्रम करोगे उतना ही आप उस फल के भागीदार होंगे अगर हमको सफल होना है तो परिश्रम करना होगा अन्यथा बिना परिश्रम के अगर हम फल की प्राप्ति करेंगे तो यह सबसे बड़ा भूल हमारे जीवन के लिए होगा तो देर किस बात की उठो और मेहनत करो और अपने सपनों को हासिल करो जय भीम जय भारत
                                       लेखक - श्याम जीत

      

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