The Real Story
यह घटना एक गांव की है उस गांव में एक भंगार वाला रहता था अपने परिवार का पेट उसी भंगार के काम से भरता अपने बेटे को अच्छी शिक्षा देने की कोशिश करता हर रोज की तरह वह आज भी अपने घर से भंगार के लिए निकला वह अपने गांव के बगल के गांव में जाता है वह गांव उसके गांव से 4 गुना बड़ा था भंगार की तलाश करते करते उसी गांव में एक चक्की वाले के पास पहुंचा वह चक्की उस चक्की वाले के घर पर ही था चक्की वाले ने उस भंगार वाले से कहा तुम कहां पर गेहूं किसाते हो हमारे पास आकर पिसाओ हम एक रुपए किलो पीसते हैं परंतु 10 किलो पर 100 ग्राम को काट लेते हैं भंगार वाला कहा ठीक है हमारे घर से नजदीक भी है वह कह कर चला गया उसके कुछ दिन बाद अपने बेटे को चक्की वाले के पास गेहूं पीसावाने के लिए भेजा और चक्की वाले की सारी बातें बताई वह चक्की पर जाता गेहूं पीसा कर घर लाता एक दो महीने बीतने के पश्चात वह लड़का गेहूं पिसाने गया और वजन काटे की तरफ अचानक देखा और चला गया दूसरे दिन वजन कांटे पर देखा तो तो कहां की यह वजन काटा से कम है जितना मेरा था उससे कम है लेकिन उसकी बातों को काटकर चक्की वाले ने बोला कि नहीं तुम्हारा वजन काटा ठीक है वह लड़का स्पष्ट नहीं था सोचा कि शायद मैं भुल रहा हूं परंतु कुछ दिन बाद फिर से आया और वजन काटे की तरफ ध्यान से देखा फिर चला गया दूसरे दिन आता है तो देखता है कि जितना उसका वजन काटा था उससे 200 ग्राम काटने के बाद भी कम दे रहा है वह लड़का बोला परंतु अगली बार की तरह इस बार भी वह चक्की वाला उस लड़के को बोलना चाहा लेकिन उसकी एक न सुनी और स्पष्ट होकर बोला अगर 20 किलो है तो आप 200 ग्राम काटकर 18 किलो 800 ग्राम देंगे परंतु आप 18 किलो 200 ग्राम ही दे रहे हैं वह चक्की वाला उस लड़के को डांटने लगा तथा चक्की वाले के परिवार वाले भी आ गए फिर बिना कुछ सोचे समझे पूरे परिवार ने उसके साथ अभद्र व्यवहार करने लगे लड़का डर गया तथा अपने पिसाए हुए गेहूं के पैसे देकर चला जाता है तथा घर पहुंचने के बाद अपने पिता से उस चक्की वाले की शिकायत करता है उसके पिता यह सब सुनकर कुछ नहीं कर पाते तो उन बेटे को समझाते हैं कि जाने दे बेटा हमारी इतनी हैसियत नहीं है कि उन सब से विरोध करें उसके सभी घर के Government जॉब करते हैं अगर हम विरोध करेंगे तो पैसे वाले हैं पैसे देकर Government का मुंह बंद कर देंगे
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